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Monday, 13 August 2018

टैक्सी वाले ने सब कुछ बेचकर एक मरती लड़की की बचाई थी जान, 3 साल बाद लड़की ने चुकाया एहसान

नमस्कार दोस्तों, आज अगर देखा जाये तो लाखों में 2-4 लोग ऐसी मिलेंगे जो इंसानियत की खातिर कुर्बान होने को तैयार रहते हैं। बाकी तो सिर्फ तमाशा देखने वाले होते हैं। आज की घटना भी कुछ ऐसी ही है जो आपको इंसानियत का पाठ जरूर पढ़ा देगी। दोस्तों क्या दुनिया में गरीब होना पाप है या गरीबी ही एक अभिशाप है। मैंने अक्सर कई लोगों से कहते सुना है कि अगर मैं गरीब न होता तो आज उस पोस्ट पर होता। हमारे कई महापुरुष ऐसे थे जिन्होंने रोड पर बैठ कर रात में पढ़ाई की। खैर मैं अपने टॉपिक पर आता हैं।


राजवीर अपनी टैक्सी निकाल कर तेजी से रोड पर जा रहा था क्योकि आज वह एक घंटा लेट था। इसलिए उसने अपनी गाड़ी की स्पीड कुछ तेज कर रखी थी, क्योंकि टैक्सी ही उस गरीब का एक पेट पालने का सहारा था। रात में ज्यादा लेट हो जाने के कारण आज देर से जगा था। इसलिए वह बड़ी तेजी से अपनी गाड़ी दौड़ा रहा था। घर से अभी वह सिर्फ तीन किलोमीटर ही निकला था कि अचानक उसने देखा कई लोगों की भीड़ लगी है। पहले तो उसने सोंचा ये सब तो दिल्ली में होता ही रहता है , किन्तु उसका दिल नहीं माना और उसने अपनी टैक्सी रोंक दी। राजवीर ने जब पास जाकर देखा तो उसके होश उड़ गए। रोड़ के किनारे एक ख़ूबसूरत लड़की खून से लथपथ पड़ी थी। राजवीर ने इधर उधर देखा तो वहां कम से कम 500 लोगों की भीड़ लगी थी, किन्तु उस बेचारी लड़की को कोई बचाने वाला नहीं था। पूंछने पर पता चला कि एक कार वाले ने इस लड़की को टक्कर मार दी। राजवीर ने आव देखा न ताब और उस लड़की को गोदी में उठा कर अपनी टैक्सी में डाल लिया और टैक्सी अस्पताल की तरफ भगाने लगा। टैक्सी सीधे लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल दिल्ली में ले गया। उसने लड़की को गोदी में उठाया और अन्दर लेकर भागा। डॉक्टर ने उसे एडमिट किया और दवाइयाँ लगानी शुरू कीं। तीन घंटे बाद राजवीर ने डॉक्टर से पूंछा की लड़की की हालत कैसी है ,तो डॉक्टर ने बताया कि उसके शरीर से बहुत खून निकल चुका है और उसका बचना भी बहुत मुश्किल लग रहा है। राजवीर ने डॉक्टर के पैर पकड़ लिए और कहा डॉक्टर साहब इस लड़की को बचा लीजिये। डॉक्टर ने बताया एक रास्ता है जिससे लड़की बच सकती है।


उसके सिर का आपरेशन करना पड़ेगा जिसके लिए 2 लाख रूपये लगेंगे और 3 बोतल खून की जरूरत पड़ेगी। इतना कहने के बाद डॉक्टर तो चला गया मगर राजवीर सोंच में पड़ गया कि आपरेशन के लिए 2 लाख रुपये मैं कहाँ से लाऊँगा। राजवीर ने अपनी माँ को फोन लगाया और सारी बात बताई। इस पर राजवीर की माँ ने कहा बेटा अब जब तूने उस बेचारी की जान बचाई ही है, तो कुछ भी कर और उसकी जान बचा लें। राजवीर के पास कोई रास्ता नहीं था, इसलिय उसने अपनी टैक्सी 2.5 लाख रुपये में बेंच दी और डॉक्टर को पैसे लाकर दिये। उस लड़की की जान तो बच गई किन्तु राजवीर ने एक -एक पाई जोड़ कर अपनी टैक्सी खरीदी थी। उसे उसको बेचना पड़ा था। तीन महीने बिस्तर पर रहने के बाद लड़की पूर्ण रूप से ठीक हो गई। जब लड़की को राजवीर के बारे में सब कुछ पता चला तो लड़की राजवीर से लिपट कर खूब रोई और कहने लगी अगर भैया आज तुम न होते तो मेरी जिन्दगी न होती। आपको बता दें कि उस लड़की का नाम आशिमा बानो था और वह राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गाँव जमीरगढ़ की रहने वाली थी। आशिमा अपने पिता की एकलौती औलाद थी। उसके पिता एक सरकारी टीचर थे जिनकी 2 साल पहले लम्बी बीमारी के बाद मौत हो गई थी। उस दिन आशिमा अपने कालेज से अपने कमरे पर आ रही थी, तभी ये हादसा हो गया। राजवीर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गाँव अख्तियारपुर का रहने वाला था। वह काफी समय से दिल्ली में भाड़े पर टैक्सी लेकर चलाता था और अभी हाल ही में उसने अपनी नई टैक्सी खरीदी थी। इस घटना के तीन साल बाद एक लड़की उसके घर पर आयी। उसने राजवीर की माँ के पाँव छुए और राजवीर के बारे में पूंछा तो माँ ने बताया, राजवीर कुछ सामान लेने गया है और अभी आता ही होगा। इतने में ही राजवीर आ गया।


उसकी हालत बहुत खराब थी। वह एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था। पहले तो राजवीर आशिमा को पहचान नहीं पाया किन्तु फिर उसे याद आया। अरे आशिमा बहन आज तुम कैसे आ गई। आशिमा ने कहा भैया कल मुझे डिग्री मिलेगी और आपको और माँ को वहां आना है। राजवीर ने कहा बहन किन्तु मैं वहां कैसे आ सकता हूँ ,वहां तो बड़े बड़े लोग होंगे। अरे भैया वहां तुमसे बड़ा कोई नहीं होगा। तुम्हे आना जरूर है। इतना कहने के बाद आशिमा तो चली गई, किन्तु राजवीर सोंच में पड़ गया कि मेरे पास तो ये गंदे कपड़े हैं जिन्हें पहन कर मैं कैसे जाऊंगा किन्तु फिर उसने सोंचा अगर बहन ने बुलाया है तो जरूर जाऊंगा। विश्वविद्यालय का हॉल पूरा भरा हुआ था। सभी कोट पैंट में लोग आये हुए थे। राजवीर भी अपनी बूढ़ी माँ को लेकर आया और सबसे पीछे बैठ गया। राष्ट्रपति महोदय द्वारा पहला नाम ही आशिमा का पुकारा गया। राष्ट्रपति महोदय ने आशिमा को बुलाया और कहा इस बेटी ने गोल्ड मैडल जीता है। आशिमा ने कहा सर मैं एक मिनट का समय चाहूंगी और आशिमा दौड़ती हुई राजवीर को अपने साथ लेकर आयी। आशिमा ने बताया कि इस गोल्ड मैडल का हकदार मेरा भाई है। यह सुन कर हॉल के सभी लोग चौंक गए। इसके बाद जब आशिमा ने उस भाई की पूरी कहानी बताई तो पूरे हॉल के लोगों की आँखों से आंसू बहने लगे और आशिमा ने जिद कर वो गोल्ड मैडल राजवीर को ही पहनवाया। आज राजवीर का सीना चौड़ा हो गया था और उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन खुशी के। इसके बाद आशिमा की कुछ दिनों बाद नौकरी लग गई और सबसे पहले उसने अपने भाई को नई टैक्सी खरीद कर दी और अपनी माँ को बुलाकर सभी एक साथ रहने लगे।

दोस्तों राजवीर और आशिमा के बारे में आपके क्या विचार हैं हमें कमेन्ट द्वारा जरूर बताएं और इसी तरह की और भी खबरों के लिए इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर, लाइक और फालो करें।

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